Aug 15, 2019

रेट एनालिसिस मतलब क्या? और कैसे करते हैं हर काम का रेट एनालिसिस?

रेट एनालिसिस 

पिछले कुछ सालों से कंस्ट्रक्शन फील्ड में रेट एनालिसिस को बहुत ज्यादा महत्त्व प्राप्त हुआ हैं। हालांकि अभीतक रेट एनालिसिस के बारे बहुत लोगोंको ज्यादा जानकारी नही हैं। लेकिन पिछले चार से पांच सालोंसे बहुत लोग रेट एनालिसिस की बात कर रहे हैं। इसके कई कारण हैं। 

उसके कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं।

1. नए और फ्रेशर इंजीनियर को ट्रेनिंग का अभाव।
2. साइट इंजीनियर को वर्क ऑर्डर से दूर रखना।
3. हाथ काम नही हैं इसलिए कोई भी कम लेना।
4. इंजीनियर को रेट एनालिसिस की कम जानकारी होना।




यहाँ पे एक बात बताना बेहद जरूरी हैं कि अगर आपको कोई भी काम आइटम का रेट एनालिसिस बनाना नही आता तो आपको वो काम नही करना चाहिए। अगर आप अभी भी कोई काम बगैर रेट एनालिसिस से कर रहे हैं तो थोड़ा रुकके आपके काम का एनालिसिस करिये नही तो आपका बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।
आज हम इसी पे बात करेंगे कि ये रेट एनालिसिस क्या हैं? ये कैसे करे? क्या क्या करना पड़ेगा? ये सब मुद्दों पर आज चर्चा करेंगे।

आप इंटरनेट पर हजारो साइट सर्च करके कोईभी काम का एनालिसिस आसानी से देख सकते है। 

लेकिन क्या आपको पता है रेट एनालिसिस क्यों बनाना पड़ता है?

आजकल कंस्ट्रक्शन के फील्ड में बहुत ही ज्यादा स्पर्धा हो रही हैं। आपको लगभग हर गली गली में  कई कॉन्ट्रैक्टर और सिविल इंजीनियर दिखाई दे रहे हैं। और हर एक कांट्रेक्टर और हर इंजीनियर खुद को आगे ले जाने की कोशिश कर रहा हैं। हर कांट्रेक्टर खुद के काम मिलने के लिए रेट कम करके भी कम करने की कोशिश कर रहा है। इसलिए पिछले 3 सालों से मटेरियल के रेट बढ़ रहे है, लेकिन लेबर और लेबर कांट्रेक्टर के रेट वैसे के वैसे ही हैं। लेकिन सच बात ये हैं कि बहुत सारे लेबर कांट्रेक्टर हाथ मे कुछ कम न होने की वजह से कम रेट में काम करने में आसानी से राजी हो जाते हैं। लेकिन जब उनकी जेब से पैसा जाने लगता हैं तो छोटे लेबर कांट्रेक्टर काम बंद कर देते हैं। इसमे डेवलपर का भी बहुत नुकसान होता हैं इसलिए रेट एनालिसिस करना बहुत जरूरी है।

रेट एनालिसिस का मतलब किसीभी कार्य का विस्तृत विवरण करना। इसको आसान भाषा मे में ऐसा भी कहा जा सकता हैं। जैसे डॉक्टर किसी बीमारी का इलाज करने के लिए आपरेशन करके, हर एक बातको पता करता हैं वैसे ही इंजीनियर को आपके हर एक काम का आपरेशन करना हैं। 

नीचे एक उदाहरण दिया हैं।

समजो, आपको एक फुटिंग को M25 ग्रेड का 1 क्यूबिक मीटर कंक्रीट करना हैं?
तो आपके दिमाग मे तुरत आना चाहिए। हमारे साइट के मिक्स डिज़ाइन रिपोर्ट के अनुसार हमको हर एक मटेरियल का इस्तेमाल करना चाहिए।


मिक्स डिज़ाइन रिपोर्ट में दिया है कि।
सीमेंट : 345 किग्रा/ क्यू मि
क्रश सैंड: 846 किग्रा/क्यू मि.
10मिमी कोर्स एग्रीगेट : 448 किग्रा/ क्यू मि.
20मिमी कोर्स एग्रीगेट : 731 किग्रा/ क्यू मि.
पानी: 162 किग्रा/ क्यू मि. (पानी और सीमेंट का रेश्यो: 0.47)
एडमिक्चर: 2.07 किग्रा/ क्यू मि.

यह विवरण के मटेरियल की क्वांटिटी में आपको जो चल रहे मार्किट रेट को आपके रेट एनालिसिस के साथ जोड़ना हैं।

लेकिन इसके पहले आपको हर एक मटेरियल का यूनिट देखना पड़ेगा क्योंकि हर एक मिक्स डिज़ाइन किलोग्राम के ऊपर डिज़ाइन किया रहता हैं। लेकिन आपको मार्किट से कोई भी चीज इतनी आसानी से किलो पर नही मिलती तो आगे क्या करे। आपका यूनिट है क्यूबिक मीटर, तो आपको आपके एनालिसिस का यूनिट बदलना पड़ेगा। लेकिन उसके लिए आपको कुछ मटेरियल की DLBD ( Dry Loose Bulk Density), ड्राई लूज़ बल्क डेंसिटी की जानकारी होनी चाहिए। यह हर एक जगह के अनुसार अलग अलग रहती हैं, यह बल्क डेंसिटी मिक्स डिज़ाइन रिपोर्ट में लिखी हुई रहती हैं। रेट एनालिसिस बनाते समय उसको जरुर ध्यान में रखे।
ड्राई लूज़ बल्क डेंसिटी मतलब 1 क्यूबिक मीटर घनता के बॉक्स में लूज़ मटेरियल डालके किया हुवा वजन जो किग्रा/क्यू मि. में होता हैं।



क्रश सैंड:                    1845 किग्रा/क्यू मि.
10मिमी कोर्स एग्रीगेट : 1588 किग्रा/ क्यू मि.
20मिमी कोर्स एग्रीगेट : 1558 किग्रा/ क्यू मि.
पानी:                           1000 किग्रा/ क्यू मि.
कंक्रीट :                       2535 किग्रा/ क्यू मि.

अब इसके आधार से हम हर मटेरियल का यूनिट बदल के मार्किट में चल रहे यूनिट के बराबर लेके आएंगे।
जैसे
सीमेंट : 345 किग्रा : 1 बैग वजन 50 किग्रा : 345/50         : 6.90 बैग
क्रश सैंड: 846 किग्रा/क्यू मि. : 846/1845                        : 0.46 क्यू मि.
10मिमी कोर्स एग्रीगेट : 448 किग्रा/ क्यू मि. : 448/1588    : 0.28 क्यू मि.
20मिमी कोर्स एग्रीगेट : 731 किग्रा/ क्यू मि. : 731/1588    : 0.46 क्यू मि.
पानी: 162 किग्रा/ क्यू मि.  : 162/1000 :0.162 क्यू मि.      :  16.2 लीटर
एडमिक्चर                                                                     : 2.07 किग्रा

अब आपको सब मटेरियल एक यूनिट में मिल गए हैं। अब उसको आपके रेट के साथ जोड़कर आप मटेरियल का खर्चा निकाल सकते हैं। अब लेबर रेट को उसमे मिलाना पड़ेगा। आपको उस एरिया का लेबर का रेट ढूंढना पड़ेगा। और काम करने के लिए लगने वाले मशीनरी का खर्चा उसमे मिलाना पड़ेगा। उसको आप 1% या 2% मिला सकते हैं। 

अब हम फाइनल नतीजे पर पहुंच सकते हैं। 

अपना रेट एनालिसिस अब इसप्रकार होगा।
1 क्यू मि कंक्रीट का रेट एनालिसिस
1. सीमेंट : 6.90 बैग X Rs. 265.00/ बैग                                                         = Rs.1828.50
2. क्रश सैंड : 0.46 क्यू मि. X 
Rs. 1095.00/ क्यू मि                                         =Rs. 501.92
3. 10मिमी कोर्स एग्रीगेट, (खड़ी/मेटल) : 0.28 क्यू मि.X 
Rs. 953.00/ क्यू मि. = Rs. 268.96
4. 20मिमी कोर्स एग्रीगेट (खड़ी/मेटल): 0.46 क्यू मि. X 
Rs. 953.00/क्यू मि.   =Rs. 438.86
5. पानी: 16.20 लीटर X 
Rs. 0.086/ लि.                                                         = Rs. 1.40
6. एडमिक्चर: 2.07 किग्रा X 
Rs. 70.00/किग्रा                                                = Rs. 144.90
टोटल मटेरिअल का खर्चा :                                                                       = 
Rs. 3184.55
प्लांट और मशीनरी : 2% :                                                                        =
Rs. 63.69
कंक्रीटिंग लेबर :                                                                                       =
Rs. 550.00/ क्यू मि.
टोटल मटेरियल और लेबर                                                                        = 
Rs. 3798.24
वॉटर & इलेक्ट्रिसिटी चार्जेस 2.00%:                                                       =
Rs.75.96
ओवरहेड्स (स्टाफ, ऑफिस, एडमिन): 5% :                                          =
Rs.189.91
1 क्यू मि कंक्रीट का मटेरियल, लेबर, मशीनरी और ओवरहेड का कुल रकम: 
Rs. 4064.11
अब आप आपका 10% प्रॉफिट उसमे ऐड करे                                             = 
Rs. 609.62
अब सब मिलाके आपका 1 क्यू मि. कंक्रीट करने के लिए कुल 
Rs. 4,673.73 मतलब लगभग Rs.4675.00 का रेट तय कर सकते हैं। 




लेकिन हर रेट एनालिसिस के रेट बाजार भाव के हिसाब से बदलते रहते हैं। यहाँ हम आपको बस यह बताना चाहते हैं कि, हर एक आइटम का रेट इसी तरस से आप निकाल सकते हैं। यह रेट एनालिसिस बनाना एक स्किल हैं और आप उसे जरूर हासिल करें। रेडीमेड रेट एनालिसिस देखने के बजाय आप खुद से रेट एनालिसिस बनाना सिख ले। 

कंस्ट्रक्शन में आप कौनसे काम का रेट एनालिसिस बना सकते हैं?

1. एक्सकैवशन : खुदाई.
2. बैक फिलिंग : मिट्टी या मुरुम का पुनर्भरण
3. रबल सोलिंग
4. पीसीसी, आरसीसी ,स्टील और शटरिंग
5. बांधकाम और प्लास्टर
6. वॉटरप्रूफिंग
7. फ्लोरिंग
8. दरवाजा और खिड़की
9. फेब्रिकेशन
10. पेंटिंग
11. प्लंबिंग
12. इलेक्ट्रिकल


हर एक इंजीनियर को इन सब काम के हर एक आइटम का रेट एनालिसिस बनाने के लिए एना चाहिए। यही हमारा लक्ष्य हैं। कि हर सिविल इंजीनियर और कांट्रेक्टर टेक्निकली स्ट्रॉन्ग होना चाहिए।


अगर आपको रेट एनालिसिस बनाते समय कुछ भी परेशानी आये तो आप हमें director.cbec@gmail.com पर मेल करें। हम आपकी जरूर सहायता करेंगे।



Team
CBEC India

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