Saturday, February 9, 2019

सिविल इंजीनियर ये 12 गलतियां क्यों करते हैं?

सिव्हिल इंजीनियर कैसे यह 12 गलतियां करते हैं?

                    आज कल हर देश के हर एक गली में पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेज खुल गया है। इसलिए इंजीनियरिंग का अध्ययन सबको बहुत आसान हो चुका है। यह एक बहुत अच्छी बात है कि सबको शिक्षा का सामान अधिकार है। लेकिन इन सब कॉलेजमेसे कुछ कॉलेज अच्छी तरह से नही पढ़ाती है। और दूसरी और बहुत महत्वपूर्ण बात यह है कि लगभग 60% इंजीनियरिंग शिक्षा लेनेवाले लड़के ध्यान देके नही पढ़ते हैं, बहुत सारे लड़के तो कॉलेज में आना पसंद नही करते। अपने ही मन से पढ़ाई करते है। मतलब उनका जब मन करे तब पढ़ते है। ज्यादातर लड़के परीक्षा के एक दिन पहले पढ़ना पसंद करते है। जैसे कोई आइंस्टाइन हो।



                      ऐसा करके वो पास तो हो जाते हैं। लेकिन वो कॉलेज पूरा करने के बाद अच्छी जॉब ढूंढने के बहुत तरसते हैं। और अगर कही एक दूसरी जॉब मिल भी गयी तो वो वहाँ पे बहुत सारी गलतियां करते है। वो कौनसी गलतिया है, और कैसे हो जाती है इसका विवरण हम विस्तृत से जानेंगे तकि उस गलतियों को सुधारने का तरीका ढूंढेंगे।



1. प्रोजेक्ट के ड्रॉइंग को अच्छे से नही समझना।

     बहुत सारे इंजीनियर ऐसे है जिनको 5-7 साल के अनुभव के बाद भी ड्राइंग नही समझ मे नही आते है।

2. काम का स्कोप ना समझना।

कई ऐसे इंजीनियर है जिनको अपने काम का स्कोप ही पता नही होता हैं, या वो अपने प्रोजेक्ट मैनेजर या अपने सीनियर से भी न पूछते, की अपना या अपनी कम्पनि का क्या काम होगा। या किस प्रकार का वर्क ऑर्डर है। पूरे काम मेसे अपने काम का कितना पार्ट है। हमको क्या क्या करना पड़ेगा।


3. बार चार्ट न समझना।

चार से पांच साल अनुभव लिए हुए इंजीनियर को भी ये बार चार्ट वाली बात समझ मे नही आती। तो नए लोगों को को बहुत दूर की बात है, पुराने इंजीनियरिंग के अभ्यास में बार चार्ट को खाली पेपर पे ही समझना पड़ता था। अब तो नई नई टेक्नोलॉजी आई है। जिससे अपने प्रोजेक्ट का बार चार्ट आसानी नई बन जाता है। लेकिन यह बात बहु महत्वपूर्ण है कि बार चार्ट को पहले बहुत अच्छी तरह से समझना चाहिए। 


4. प्लानिंग को नजरअंदाज करना।

जिस इंजीनियर को बार चार्ट समझ मे नही आता, वह अपने प्रोजेक्ट की प्लानिंग कभी नही कर पाता है। तो बार चार्ट के साथ साथ प्लांनिग को भी उतना ही महत्व है। और बहुत इंजीनियर ऐसे है जो प्लांनिग को हर बार नजरअंदाज करते है। हर काम हो समय पे खत्म नही करते। हां, एक बात है कि कभी कभी कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। या काम मे कुछ बाधा आती है। लेकिन आप अगर सब पॉइंट को समझ मे लेकर प्लानिंग करते है। तो आप कभी फेल नही होंगे।

5. लेबर कॉन्ट्रेक्टर से प्लानिंग की बात नही करना।

काम करनेवाला लेबर कॉन्ट्रेक्टर ही होता हैं। लेकिन बहुत सारे इंजीनियर अपने काम की प्लानिंग की बात कॉन्ट्रेक्टर के साथ नही करते, और उसको पूरी बात नही समजाते है। इससे वो अपनी मन से ही काम करता है। और आपका प्रोजेक्ट समय पे खत्म नही होता है।

6. लेबर कॉन्ट्रेक्टर के काम का स्कोप न समझना।

कई साइट पे ऐसा देखा गया है कि कॉन्ट्रेक्टर को अपना क्या क्या क्या काम है ये पता ही नही चलता। और उसको इंजीनियर भी नही समजाता है।

7. हर बात पर सुपरवाइजर पे डिपेंड रहना।

बहुत सारे इंजीनियर का मानना है कि, "देख लेगा सुपरवायर" लेकिन सुपरवायजर आपकी हेल्प के लिए होता है। ओ आपके ऊपर डिपेंड होना चाहिए। नाकि आप उसपे।


8. एक का काम दूसरे को बताना।

जिस लेबर को या कांट्रेक्टर को जो काम दिया है। साइट इंजीनियर या सुपरवाइजर दूसरे कोई रुक हुआ काम दूसरे कॉन्ट्रेक्टर से पूरा करने की कोशिश करते है। जो कभी अच्छी क्वालिटी के साथ नही होता हैं।

9. खुद जिम्मेदारी न लेना और हर काम से भागने की कोशिश करना।

जब कहाँ पे कोई गलती होती है और वो पकड़ी जाती है तो बहुत सारे इंजीनियर अपने काम की जिम्मेदारी नही लेते है। और " ये मेरा काम नही है" , "मैं उस समय वहां नही था" , "मैंने सुपरवाइजर को बोला था, या कॉन्ट्रेक्टर को बोला था"। ऐसा बोलकर  भागने की कोशिश करते हैं।     

10. सेफ्टी को नजरअंदाज करना।


अपना काम जल्दी जल्दी पूरा करने के चक्कर मे बहुत इंजीनियर अपने लेबर या वर्कर के सेफ्टी को नही देखते है, इससे बड़ी दुर्घटना हो सकती हैं।

11. हर काम का स्टैण्डर्ड प्रोसीजर को फॉलो नही करना।

बहुत इंजीनियर को अपने काम करने की प्रोसेस ही मालूम नही है। जैसे कंक्रीट करने के लिए क्या मटेरियल  लागनेवाला है यह पता होता है लेकिन कितना लगनेवाला ये भी पता नही होता है और कंक्रीट कैसे बनाते हैं। ये भी पता नही होता है।

12. डेली रिपोर्टिंग नही करना।

अपने आलस के या अपनी जिम्मेदारी से भागने के लिए बहुत सारे के इंजीनियर आज दिन में हुए काम का रिपोर्ट नही बनाते।


                       ऐसा करके यह इंजीनियर 3-4 साल निकाल लेते हैं लेकिन उसके बाद उनको बहुत चैलेंजेस झेलने पड़ते है, और बहुत सारे इंजीनियर बाद में इधर उधर नए नए क्लासेस लगाने के चक्कर मे पड़ जाते हैं।
सच देखा जय तो किसी भी साईट इंजीनियर को कोई भी क्लास लगाने की जरूरत नही है। अगर शुरू से अच्छे तएके से कम करेंगे तो बहुत आगे जा सकते हैं।







1 comment:

  1. Great Knowledge, seen as the practical experience of site engineers

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